उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
फिरत सदा माया कर प्रेरा। काल कर्म सुभाव गुन घेरा।।
मूल पाठ
फिरत सदा माया कर प्रेरा। काल कर्म सुभाव गुन घेरा।।
कबहुँक करि करुना नर देही। देत ईस बिनु हेतु सनेही।।
स्रोत अभिलेख 7.44 · पुस्तक पृ. 951, 951
भावार्थ
मूल पाठ के बादमायाकी प्रेरणासे काल, कर्म, स्वभाव और गुणसे घिरा हुआ (इनके वशमें हुआ) यह सदा भटकता रहता है। बिना ही कारण स्नेह करनेवाले ईश्वर कभी विरले ही दया करके इसे मनुष्यका शरीर देते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 951 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 फिरत सदा माया कर प्रेरा। काल कर्म सुभाव गुन घेरा।।
English explanation
Driven by maya, this soul wanders continually, encompassed by time, karma, its disposition, and the qualities of nature.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिरत | भटकता रहता है | keeps wandering |
| सदा | सदा | always |
| माया | माया; मोहकारी शक्ति | maya; the deluding power |
| कर | की | of |
| प्रेरा | प्रेरणा से प्रेरित | impelled by |
| काल | काल | time |
| कर्म | कर्म और उनका प्रभाव | karma and its effects |
| सुभाव | स्वभाव | inherent disposition |
| गुन | प्रकृति के गुण | qualities of nature |
| घेरा | से घिरा हुआ | surrounded by |
2 कबहुँक करि करुना नर देही। देत ईस बिनु हेतु सनेही।।
English explanation
Sometimes, out of compassion, God, who loves without any self-interested motive, gives the soul a human body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबहुँक | कभी; किसी अवसर पर | sometimes; on an occasion |
| करि | करके | having shown |
| करुना | करुणा | compassion |
| नर | मानव | human |
| देही | शरीर | body |
| देत | देते हैं | gives |
| ईस | ईश्वर | God |
| बिनु | बिना | without |
| हेतु | स्वार्थ या अपेक्षा | self-interest or expectation |
| सनेही | प्रेम करने वाले | loving |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 951
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
- मुद्रित पृष्ठ
- 951, 951
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।