उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धरम तड़ाग ग्यान बिग्याना। ए पंकज बिकसे बिधि नाना।।
मूल पाठ
धरम तड़ाग ग्यान बिग्याना। ए पंकज बिकसे बिधि नाना।।
सुख संतोष बिराग बिबेका। बिगत सोक ए कोक अनेका।।
स्रोत अभिलेख 7.31 · पुस्तक पृ. 940, 940
भावार्थ
मूल पाठ के बादधर्मरूपी तालाबमें ज्ञान, विज्ञान—ये अनेकों प्रकारके कमल खिल उठे। सुख, संतोष, वैराग्य और विवेक—ये अनेकों चकवे शोकरहित हो गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 940 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 धरम तड़ाग ग्यान बिग्याना। ए पंकज बिकसे बिधि नाना।।
English explanation
In the lake of righteousness, the lotuses of knowledge and realized understanding blossomed in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरम | धर्म; सदाचरण | righteousness |
| तड़ाग | सरोवर | lake |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| बिग्याना | अनुभवसिद्ध ज्ञान | realized understanding |
| ए | ये | these |
| पंकज | कमल | lotuses |
| बिकसे | खिल उठे | blossomed |
| बिधि | रीतियों से | in ways |
| नाना | अनेक | many |
2 सुख संतोष बिराग बिबेका। बिगत सोक ए कोक अनेका।।
English explanation
The many chakravaka birds of happiness, contentment, detachment, and discernment became free from sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुख | सुख | happiness |
| संतोष | संतोष | contentment |
| बिराग | वैराग्य; आसक्ति का अभाव | detachment |
| बिबेका | विवेक; सही भेद करने की क्षमता | discernment |
| बिगत | दूर हो गया | departed |
| सोक | शोक | sorrow |
| ए | ये | these |
| कोक | चक्रवाक पक्षी | chakravaka waterbirds |
| अनेका | अनेक | many |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 940
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 940, 940
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।