उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिबिध कर्म गुन काल सुभाऊ। ए चकोर सुख लहहिं न काऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभाँति-भाँतिके [बन्धनकारक] कर्म, गुण, काल और स्वभाव—ये चकोर हैं, जो [रामप्रतापरूपी सूर्यके प्रकाशमें] कभी सुख नहीं पाते। मत्सर (डाह), मान, मोह और मदरूपी जो चोर हैं, उनका हुनर (कला) भी किसी ओर नहीं चल पाता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 940 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिबिध कर्म गुन काल सुभाऊ। ए चकोर सुख लहहिं न काऊ।।
मत्सर मान मोह मद चोरा। इन्ह कर हुनर न कवनिहुँ ओरा।।
स्रोत अभिलेख 7.31 · पुस्तक पृ. 940, 940
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिबिध कर्म गुन काल सुभाऊ। ए चकोर सुख लहहिं न काऊ।।
English explanation
Various actions, qualities, time, and inherent disposition—these, pictured as chakora birds, never find happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिबिध | विविध | various |
| कर्म | कर्म | actions |
| गुन | गुण | qualities |
| काल | काल; समय | time |
| सुभाऊ | स्वभाव | inherent disposition |
| ए | ये | these |
| चकोर | चकोर पक्षी | moon-loving partridges |
| सुख | सुख | happiness |
| लहहिं | पाते हैं | obtain |
| न | नहीं | not |
| काऊ | कभी | ever |
2 मत्सर मान मोह मद चोरा। इन्ह कर हुनर न कवनिहुँ ओरा।।
English explanation
The tricks of the thieves—envy, pride, delusion, and arrogance—work nowhere.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मत्सर | ईर्ष्या | envy |
| मान | अभिमान | pride |
| मोह | मोह; भ्रमपूर्ण आसक्ति | delusion and attachment |
| मद | मद; अहंकार का नशा | arrogant self-intoxication |
| चोरा | चोर | thieves |
| इन्ह | इनका | these |
| कर | का | of |
| हुनर | चालाकी; छल-कौशल | cunning tricks |
| न | नहीं चलता | does not work |
| कवनिहुँ | किसी भी | any whatsoever |
| ओरा | ओर | direction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 940
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 940, 940
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।