उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिन्हहि सोक ते कहउँ बखानी। प्रथम अबिद्या निसा नसानी।।
मूल पाठ
जिन्हहि सोक ते कहउँ बखानी। प्रथम अबिद्या निसा नसानी।।
अघ उलूक जहँ तहाँ लुकाने। काम क्रोध कैरव सकुचाने।।
स्रोत अभिलेख 7.31 · पुस्तक पृ. 940, 940
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन-जिनको शोक हुआ, उन्हें मैं बखानकर कहता हूँ। [सर्वत्र प्रकाश छा जानेसे] पहले तो अविद्यारूपी रात्रि नष्ट हो गयी। पापरूपी उल्लू जहाँ-तहाँ छिप गये और काम-क्रोधरूपी कुमुद मुँद गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 940 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जिन्हहि सोक ते कहउँ बखानी। प्रथम अबिद्या निसा नसानी।।
English explanation
I shall describe those who suffered sorrow. First, the night of ignorance was dispelled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्हहि | जिन्हें | those to whom |
| सोक | शोक हुआ | sorrow came |
| ते | उनका | those |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I tell |
| बखानी | विस्तार से वर्णन करके | by describing in detail |
| प्रथम | सबसे पहले | first |
| अबिद्या | अविद्या; अज्ञान | spiritual ignorance |
| निसा | रात | night |
| नसानी | नष्ट हो गई | was dispelled |
2 अघ उलूक जहँ तहाँ लुकाने। काम क्रोध कैरव सकुचाने।।
English explanation
The owls of sin hid here and there; the night-blooming water lilies of desire and anger closed up.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अघ | पाप | sins |
| उलूक | उल्लू | owls |
| जहँ | जहाँ | where |
| तहाँ | तहाँ; वहाँ | there |
| लुकाने | छिप गए | hid away |
| काम | कामवासना | lust |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| कैरव | रात में खिलने वाले कुमुद | night-blooming water lilies |
| सकुचाने | सिमट गए | closed up |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 940
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 940, 940
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।