उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब ते राम प्रताप खगेसा। उदित भयउ अति प्रबल दिनेसा।।
मूल पाठ
जब ते राम प्रताप खगेसा। उदित भयउ अति प्रबल दिनेसा।।
पूरि प्रकास रहेउ तिहुँ लोका। बहुतेन्ह सुख बहुतन मन सोका।।
स्रोत अभिलेख 7.31 · पुस्तक पृ. 940, 940
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[काकभुशुण्डिजी कहते हैं—] हे पक्षिराज गरुडज़ी! जबसे रामप्रतापरूपी अत्यन्त प्रचण्ड सूर्य उदित हुआ, तबसे तीनों लोकोंमें पूर्ण प्रकाश भर गया है। इससे बहुतोंको सुख और बहुतोंके मनमें शोक हुआ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 940 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जब ते राम प्रताप खगेसा। उदित भयउ अति प्रबल दिनेसा।।
English explanation
O Garuda, king of birds, ever since the exceedingly powerful sun of Rama’s glory arose—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| ते | से | since |
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| प्रताप | तेज और प्रभाव | glory and power |
| खगेसा | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| उदित | उगा हुआ | risen |
| भयउ | हुआ | became |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| प्रबल | शक्तिशाली | powerful |
| दिनेसा | सूर्य | sun |
2 पूरि प्रकास रहेउ तिहुँ लोका। बहुतेन्ह सुख बहुतन मन सोका।।
English explanation
Its light filled all three worlds; many found happiness, while many others felt sorrow in their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूरि | भरकर | filling completely |
| प्रकास | प्रकाश | light |
| रहेउ | व्याप्त रहा | pervaded |
| तिहुँ | तीनों | all three |
| लोका | लोकों में | worlds |
| बहुतेन्ह | बहुतों को | to many |
| सुख | आनंद | happiness |
| बहुतन | बहुतों के | of many others |
| मन | मन में | in their hearts |
| सोका | शोक | sorrow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 940
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 940, 940
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