उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धन्य देस सो जहँ सुरसरी। धन्य नारि पतिब्रत अनुसरी।।
मूल पाठ
धन्य देस सो जहँ सुरसरी। धन्य नारि पतिब्रत अनुसरी।।
धन्य सो भूपु नीति जो करई। धन्य सो द्विज निज धर्म न टरई।।
स्रोत अभिलेख 7.127 · पुस्तक पृ. 1042, 1042
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह देश धन्य है जहाँ श्रीगङ्गाजी हैं, वह स्त्री धन्य है जो पातिव्रत-धर्मका पालन करती है। वह राजा धन्य है जो न्याय करता है और वह ब्राह्मण धन्य है जो अपने धर्मसे नहीं डिगता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1042 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 धन्य देस सो जहँ सुरसरी। धन्य नारि पतिब्रत अनुसरी।।
English explanation
Blessed is the land where the Ganges flows; blessed is the woman who observes the vow of fidelity to her husband.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धन्य | धन्य | blessed |
| देस | देश या प्रदेश | land or region |
| सो | वह | that |
| जहँ | जहाँ | where |
| सुरसरी | गंगा नदी | the Ganges River |
| धन्य | धन्य | blessed |
| नारि | स्त्री | woman |
| पतिब्रत | पति के प्रति निष्ठा के व्रत का | the vow of fidelity to her husband |
| अनुसरी | पालन करने वाली | one who observes |
2 धन्य सो भूपु नीति जो करई। धन्य सो द्विज निज धर्म न टरई।।
English explanation
Blessed is the king who governs according to right principles; blessed is the Brahmin who does not depart from his own duty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धन्य | धन्य | blessed |
| सो | वह | that |
| भूपु | राजा | king |
| नीति | नीतिसंगत शासन | principled governance |
| जो | जो | who |
| करई | करता है | practices |
| धन्य | धन्य | blessed |
| सो | वह | that |
| द्विज | ब्राह्मण | Brahmin |
| निज | अपने | his own |
| धर्म | धर्म और कर्तव्य से | from religious duty |
| न | नहीं | not |
| टरई | हटता है | departs |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.127
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1042
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1042, 1042
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।