उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नीति निपुन सोइ परम सयाना। श्रुति सिद्धांत नीक तेहिं जाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो छल छोड़कर श्रीरघुवीरका भजन करता है, वही नीतिमें निपुण है, वही परम बुद्धिमान् है। उसीने वेदोंके सिद्धान्तको भलीभाँति जाना है। वही कवि, वही विद्वान् तथा वही रणधीर है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1042 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नीति निपुन सोइ परम सयाना। श्रुति सिद्धांत नीक तेहिं जाना।।
सोइ कबि कोबिद सोइ रनधीरा। जो छल छाड़ि भजइ रघुबीरा।।
स्रोत अभिलेख 7.127 · पुस्तक पृ. 1042, 1042
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नीति निपुन सोइ परम सयाना। श्रुति सिद्धांत नीक तेहिं जाना।।
English explanation
That person alone is skilled in right conduct and supremely discerning; that person has understood the teachings of the Vedas well.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नीति | नीति और उचित आचरण में | in ethical and practical conduct |
| निपुन | कुशल | skilled |
| सोइ | वही | that person alone |
| परम | अत्यंत | supremely |
| सयाना | विवेकी | discerning |
| श्रुति | वेदों के | of the Vedas |
| सिद्धांत | निष्कर्ष और मूल सिद्धांत | conclusions and fundamental teachings |
| नीक | भलीभाँति | well |
| तेहिं | उसी ने | that very person |
| जाना | समझा है | has understood |
2 सोइ कबि कोबिद सोइ रनधीरा। जो छल छाड़ि भजइ रघुबीरा।।
English explanation
That person alone is a poet and scholar, and steadfast in battle, who abandons deceit and worships Rama, the hero of Raghu’s lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that person alone |
| कबि | कवि | poet |
| कोबिद | विद्वान | scholar |
| सोइ | वही | that person alone |
| रनधीरा | युद्ध में धैर्यवान वीर | a steadfast warrior in battle |
| जो | जो | who |
| छल | कपट | deceit |
| छाड़ि | छोड़कर | having abandoned |
| भजइ | भजन करता है | worships devotedly |
| रघुबीरा | रघुवंश के वीर राम को | Rama, hero of Raghu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.127
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1042
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1042, 1042
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।