उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोइ सर्बग्य गुनी सोइ ग्याता। सोइ महि मंडित पंडित दाता।।
मूल पाठ
सोइ सर्बग्य गुनी सोइ ग्याता। सोइ महि मंडित पंडित दाता।।
धर्म परायन सोइ कुल त्राता। राम चरन जा कर मन राता।।
स्रोत अभिलेख 7.127 · पुस्तक पृ. 1042, 1042
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिसका मन श्रीरामजीके चरणोंमें अनुरक्त है, वही सर्वज्ञ (सब कुछ जाननेवाला) है, वही गुणी है, वही ज्ञानी है। वही पृथ्वीका भूषण, पण्डित और दानी है। वही धर्मपरायण है और वही कुलका रक्षक है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1042 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सोइ सर्बग्य गुनी सोइ ग्याता। सोइ महि मंडित पंडित दाता।।
English explanation
That person alone is all-knowing, virtuous, and wise; that person is an honored scholar and giver on earth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that person alone |
| सर्बग्य | सब जानने वाला | all-knowing |
| गुनी | गुणवान | virtuous |
| सोइ | वही | that person alone |
| ग्याता | ज्ञान रखने वाला | one who possesses knowledge |
| सोइ | वही | that person alone |
| महि | पृथ्वी पर | on earth |
| मंडित | सम्मानित | honored |
| पंडित | विद्वान | learned scholar |
| दाता | दान देने वाला | generous giver |
2 धर्म परायन सोइ कुल त्राता। राम चरन जा कर मन राता।।
English explanation
That person is devoted to righteousness and a deliverer of their family, whose heart is attached to Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धर्म | धर्म के | to righteousness |
| परायन | प्रति समर्पित | devoted |
| सोइ | वही | that person alone |
| कुल | अपने वंश का | of their lineage |
| त्राता | उद्धार करने वाला | deliverer |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| जा | जिस | whose |
| कर | का | possessive marker |
| मन | मन | heart |
| राता | प्रेम में रंगा है | is lovingly absorbed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.127
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1042
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1042, 1042
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।