उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देव दनुज गन नाना जाती। सकल जीव तहँ आनहि भाँती।।
मूल पाठ
देव दनुज गन नाना जाती। सकल जीव तहँ आनहि भाँती।।
महि सरि सागर सर गिरि नाना। सब प्रपंच तहँ आनइ आना।।
स्रोत अभिलेख 7.81 · पुस्तक पृ. 983, 984
भावार्थ
मूल पाठ के बादतथा नाना जातिके देवता एवं दैत्यगण थे। सभी जीव वहाँ दूसरे ही प्रकारके थे। अनेक पृथ्वी, नदी, समुद्र, तालाब, पर्वत तथा सब सृष्टि वहाँ दूसरी-ही-दूसरी प्रकारकी थी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 984 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देव दनुज गन नाना जाती। सकल जीव तहँ आनहि भाँती।।
English explanation
There are groups of gods and demons of many kinds; all living beings there have different forms.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देव | देवता | gods |
| दनुज | दानव | demons |
| गन | समूह | groups |
| नाना | अनेक प्रकार की | of many different |
| जाती | जातियाँ या श्रेणियाँ | kinds or classes |
| सकल | सभी | all |
| जीव | जीवधारी | living beings |
| तहँ | वहाँ | there |
| आनहि | और ही; भिन्न ही | quite different |
| भाँती | प्रकार से | in manner or form |
2 महि सरि सागर सर गिरि नाना। सब प्रपंच तहँ आनइ आना।।
English explanation
There are lands, rivers, oceans, lakes, and many mountains; the entire manifested world there differs in its forms.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महि | पृथ्वी या भूमि | earth or land |
| सरि | नदियाँ | rivers |
| सागर | समुद्र | oceans |
| सर | सरोवर | lakes |
| गिरि | पर्वत | mountains |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| सब | समस्त | entire |
| प्रपंच | दृश्य जगत का विस्तार | the manifested world's expanse |
| तहँ | वहाँ | there |
| आनइ | और ही; भिन्न ही | quite different |
| आना | अन्य प्रकार का | of another kind |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.81
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 984
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 983, 984
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