उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लोक लोक प्रति भिन्न बिधाता। भिन्न बिष्नु सिव मनु दिसित्राता।।
मूल पाठ
लोक लोक प्रति भिन्न बिधाता। भिन्न बिष्नु सिव मनु दिसित्राता।।
नर गंधर्ब भूत बेताला। किंनर निसिचर पसु खग ब्याला।।
स्रोत अभिलेख 7.81 · पुस्तक पृ. 983, 984
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रत्येक लोकमें भिन्न-भिन्न ब्रह्मा, भिन्न-भिन्न विष्णु, शिव, मनु, दिक्पाल, मनुष्य, गन्धर्व, भूत, वैताल, किन्नर, राक्षस, पशु, पक्षी, सर्प,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 983 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लोक लोक प्रति भिन्न बिधाता। भिन्न बिष्नु सिव मनु दिसित्राता।।
English explanation
AI draft: Each world has a distinct Brahma; its Vishnu, Shiva, Manu, and guardians of the directions are also distinct.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोक | लोक | world |
| लोक | लोक—पुनरुक्ति से प्रत्येक लोक | world—repetition indicates every world |
| प्रति | प्रत्येक में | in each |
| भिन्न | अलग | distinct |
| बिधाता | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| भिन्न | अलग-अलग | distinct |
| बिष्नु | विष्णु, पालनकर्ता देव | Vishnu, the preserver |
| सिव | शिव | Shiva |
| मनु | मनु, मानव वंश के आदिपुरुष | Manu, progenitor of humankind |
| दिसित्राता | दिशाओं के रक्षक दिक्पाल | guardians of the directions |
2 नर गंधर्ब भूत बेताला। किंनर निसिचर पसु खग ब्याला।।
English explanation
Humans, celestial musicians, ghosts, vetalas, kinnaras, demons, animals, birds, and serpents too are distinct.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नर | मनुष्य | humans |
| गंधर्ब | गंधर्व, स्वर्गीय गायक | gandharvas, celestial musicians |
| भूत | भूत-प्रेत | ghosts |
| बेताला | बेताल, प्रेतविशेष | vetalas, a kind of spirit |
| किंनर | किन्नर, दिव्य प्राणियों का एक वर्ग | kinnaras, a class of celestial beings |
| निसिचर | रात्रिचर राक्षस | night-roaming demons |
| पसु | पशु | animals |
| खग | पक्षी | birds |
| ब्याला | सर्प | serpents |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.81
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 983
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 983, 984
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।