उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अंडकोस प्रति प्रति निज रुपा। देखेउँ जिनस अनेक अनूपा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दप्रत्येक ब्रह्माण्डमें मैंने अपना रूप देखा तथा अनेकों अनुपम वस्तुएँ देखीं। प्रत्येक भुवनमें न्यारी ही अवधपुरी, भिन्न ही सरयूजी और भिन्न प्रकारके ही नर-नारी थे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 984 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अंडकोस प्रति प्रति निज रुपा। देखेउँ जिनस अनेक अनूपा।।
अवधपुरी प्रति भुवन निनारी। सरजू भिन्न भिन्न नर नारी।।
स्रोत अभिलेख 7.81 · पुस्तक पृ. 983, 984
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अंडकोस प्रति प्रति निज रुपा। देखेउँ जिनस अनेक अनूपा।।
English explanation
In each universe I saw my own form, as well as many incomparable kinds of things.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंडकोस | ब्रह्मांड, विश्व-अंड का आवरण सहित क्षेत्र | universe, the cosmic egg with its enclosing shell |
| प्रति | प्रत्येक में | in each |
| प्रति | हर एक में | in every single one |
| निज | अपना | my own |
| रुपा | स्वरूप | form |
| देखेउँ | मैंने देखा | I saw |
| जिनस | वस्तुएँ या प्रकार | things or kinds |
| अनेक | बहुत-से | many |
| अनूपा | अनुपम | incomparable |
2 अवधपुरी प्रति भुवन निनारी। सरजू भिन्न भिन्न नर नारी।।
English explanation
In each world, the city of Ayodhya was distinct; the Sarayu was different, and so were its men and women.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवधपुरी | अयोध्या नगरी | the city of Ayodhya |
| प्रति | प्रत्येक में | in each |
| भुवन | जगत या ब्रह्मांड | world or universe |
| निनारी | न्यारी; अलग | distinct; different |
| सरजू | सरयू नदी | the Sarayu River |
| भिन्न | अलग | different |
| भिन्न | अलग | different |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.81
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 984
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 983, 984
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