उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहिं मम पद सादर सिरु नावा। पुनि आपन संदेह सुनावा।।
मूल पाठ
तेहिं मम पद सादर सिरु नावा। पुनि आपन संदेह सुनावा।।
सुनि ता करि बिनती मृदु बानी। परेम सहित मैं कहेउँ भवानी।।
स्रोत अभिलेख 7.61 · पुस्तक पृ. 965, 965
भावार्थ
मूल पाठ के बादगरुडऩे आदरपूर्वक मेरे चरणोंमें सिर नवाया और फिर मुझको अपना सन्देह सुनाया। हे भवानी! उनकी विनती और कोमल वाणी सुनकर मैंने प्रेमसहित उनसे कहा—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 965 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तेहिं मम पद सादर सिरु नावा। पुनि आपन संदेह सुनावा।।
English explanation
AI draft: He (Garuda) respectfully bowed his head at my feet, then expressed his doubt.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहिं | उसने (गरुड़ ने) | he (Garuda) |
| मम | मेरे | my |
| पद | चरणों में | at the feet |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सिरु | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
| पुनि | फिर | then |
| आपन | अपना | his own |
| संदेह | संदेह | doubt |
| सुनावा | सुनाया | expressed |
2 सुनि ता करि बिनती मृदु बानी। परेम सहित मैं कहेउँ भवानी।।
English explanation
O Bhavani, hearing his request and gentle words, I spoke with love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| ता | उसकी | his |
| करि | की | possessive marker |
| बिनती | विनती | request |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी | speech |
| परेम | प्रेम | love |
| सहित | सहित | with |
| मैं | मैंने (शिव ने) | I (Shiva) |
| कहेउँ | कहा | said |
| भवानी | हे भवानी (पार्वती)! | O Bhavani (Parvati)! |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 965
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 965, 965
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