उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मिलेहु गरुड़ मारग महँ मोही। कवन भाँति समुझावौं तोही।।
मूल पाठ
मिलेहु गरुड़ मारग महँ मोही। कवन भाँति समुझावौं तोही।।
तबहि होइ सब संसय भंगा। जब बहु काल करिअ सतसंगा।।
स्रोत अभिलेख 7.61 · पुस्तक पृ. 965, 965
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे गरुड़! तुम मुझे रास्तेमें मिले हो। राह चलते मैं तुम्हें किस प्रकार समझाऊँ? सब सन्देहोंका तो तभी नाश हो जब दीर्घ कालतक सत्संग किया जाय॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 965 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मिलेहु गरुड़ मारग महँ मोही। कवन भाँति समुझावौं तोही।।
English explanation
O Garuda, you have met me on the road; how am I to explain this to you?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिलेहु | तुम मिले हो | you have met |
| गरुड़ | हे गरुड़ (विष्णु के वाहन)! | O Garuda (Vishnu’s mount)! |
| मारग | मार्ग | road |
| महँ | में | on |
| मोही | मुझे | me |
| कवन | किस | what |
| भाँति | प्रकार | manner |
| समुझावौं | मैं समझाऊँ | am I to explain |
| तोही | तुम्हें | to you |
2 तबहि होइ सब संसय भंगा। जब बहु काल करिअ सतसंगा।।
English explanation
All doubts are dispelled only when one engages in holy company for a long time.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तबहि | तभी | only then |
| होइ | होता है | occurs |
| सब | सभी | all |
| संसय | संदेहों का | of doubts |
| भंगा | नाश | dissolution |
| जब | जब | when |
| बहु | बहुत | a long |
| काल | समय तक | time |
| करिअ | किया जाए | one engages in |
| सतसंगा | संतों और सज्जनों का संग | holy company |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 965
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 965, 965
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।