उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेउ यह चरित देखि ठगि रहहीं। उमा तासु गुन नर किमि कहहीं।।
मूल पाठ
तेउ यह चरित देखि ठगि रहहीं। उमा तासु गुन नर किमि कहहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.9 · पुस्तक पृ. 916, 917
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरन्तु वे भी यह चरित्र देखकर ठगे-से रह जाते हैं (स्तम्भित हो रहते हैं)। [शिवजी कहते हैं—] हे उमा! तब भला मनुष्य उनके गुणोंको कैसे कह सकते हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 917 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तेउ यह चरित देखि ठगि रहहीं। उमा तासु गुन नर किमि कहहीं।।
English explanation
Even they are left spellbound on seeing these events. O Uma, how can mortals describe his virtues?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेउ | वे भी | even they |
| यह | यह | these |
| चरित | चरित; घटनाएँ | deeds and events |
| देखि | देखकर | on seeing |
| ठगि | स्तब्ध | spellbound |
| रहहीं | रह जाते हैं | remain |
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| तासु | उन राम के | his, referring to Rama |
| गुन | गुण | virtues |
| नर | मनुष्य | mortals |
| किमि | कैसे | how |
| कहहीं | कह सकते हैं | can describe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 917
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 916, 917
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।