उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करहिं आरती आरतिहर कें। रघुकुल कमल बिपिन दिनकर कें।।
मूल पाठ
करहिं आरती आरतिहर कें। रघुकुल कमल बिपिन दिनकर कें।।
पुर सोभा संपति कल्याना। निगम सेष सारदा बखाना।।
स्रोत अभिलेख 7.9 · पुस्तक पृ. 916, 917
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे आर्तिहर (दु:खोंको हरनेवाले) और सूर्यकुलरूपी कमलवनके प्रफुल्लित करनेवाले सूर्य श्रीरामजीकी आरती कर रही हैं। नगरकी शोभा, सम्पत्ति और कल्याणका वेद, शेषजी और सरस्वतीजी वर्णन करते हैं—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 916 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करहिं आरती आरतिहर कें। रघुकुल कमल बिपिन दिनकर कें।।
English explanation
They performed the lamp ceremony for Rama, the remover of distress, who is the sun to the lotus grove of Raghu's lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहिं | करती हैं | perform |
| आरती | दीपों से पूजन | worship with lamps |
| आरतिहर | दुःख दूर करने वाले राम | Rama, remover of distress |
| कें | की | for |
| रघुकुल | रघु का वंश | Raghu's lineage |
| कमल | कमलों का | of lotuses |
| बिपिन | वन | grove |
| दिनकर | सूर्यरूपी राम | Rama as the sun |
| कें | की | for |
2 पुर सोभा संपति कल्याना। निगम सेष सारदा बखाना।।
English explanation
The Vedas, Shesha, and Saraswati describe the city's beauty, prosperity, and blessedness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुर | नगर की | of the city |
| सोभा | सुंदरता | beauty |
| संपति | समृद्धि | prosperity |
| कल्याना | मंगल और सुख | blessedness and well-being |
| निगम | वेद | the Vedas |
| सेष | शेषनाग | Shesha, the divine serpent |
| सारदा | वाणी की देवी सरस्वती | Saraswati, goddess of speech |
| बखाना | वर्णन करते हैं | describe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 916
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 916, 917
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