उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तहाँ रहे सनकादि भवानी। जहँ घटसंभव मुनिबर ग्यानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[शिवजी कहते हैं—] हे भवानी! सनकादि मुनि वहाँ गये थे (वहींसे चले आ रहे थे) जहाँ ज्ञानी मुनिश्रेष्ठ श्रीअगस्त्यजी रहते थे। श्रेष्ठ मुनिने श्रीरामजीकी बहुत-सी कथाएँ वर्णन की थीं, जो ज्ञान उत्पन्न करनेमें उसी प्रकार समर्थ हैं, जैसे अरणि लकड़ीसे अग्रि उत्पन्न होती है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 941 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तहाँ रहे सनकादि भवानी। जहँ घटसंभव मुनिबर ग्यानी।।
राम कथा मुनिबर बहु बरनी। ग्यान जोनि पावक जिमि अरनी।।
स्रोत अभिलेख 7.32 · पुस्तक पृ. 941, 941
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तहाँ रहे सनकादि भवानी। जहँ घटसंभव मुनिबर ग्यानी।।
English explanation
O Bhavani, Sanaka and the other sages were staying where the wise, eminent sage Agastya dwelt.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहाँ | वहाँ | there |
| रहे | रह रहे थे | were staying |
| सनकादि | सनक आदि कुमार ऋषि | Sanaka and the other Kumara sages |
| भवानी | हे पार्वती | O Parvati |
| जहँ | जहाँ | where |
| घटसंभव | घड़े से उत्पन्न अगस्त्य ऋषि | Agastya, the jar-born sage |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि | eminent sage |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
2 राम कथा मुनिबर बहु बरनी। ग्यान जोनि पावक जिमि अरनी।।
English explanation
The eminent sage Agastya recounted Rama’s story at length. This story is the source of spiritual knowledge, as kindling sticks are the source of fire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम की | of Rama |
| कथा | कथा | story |
| मुनिबर | मुनिश्रेष्ठ अगस्त्य ने | the eminent sage Agastya |
| बहु | विस्तार से | at length |
| बरनी | वर्णन किया | recounted |
| ग्यान | आध्यात्मिक ज्ञान | spiritual knowledge |
| जोनि | उद्गम | source |
| पावक | अग्नि | fire |
| जिमि | जैसे | just as |
| अरनी | रगड़कर अग्नि उत्पन्न करने वाला अरणि-काष्ठ | wooden sticks used to produce fire by friction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 941
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 941, 941
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।