उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रूप धरें जनु चारिउ बेदा। समदरसी मुनि बिगत बिभेदा।।
मूल पाठ
रूप धरें जनु चारिउ बेदा। समदरसी मुनि बिगत बिभेदा।।
आसा बसन ब्यसन यह तिन्हहीं। रघुपति चरित होइ तहँ सुनहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.32 · पुस्तक पृ. 941, 941
भावार्थ
मूल पाठ के बादमानो चारों वेद ही बालकरूप धारण किये हों। वे मुनि समदर्शी और भेदरहित हैं। दिशाएँ ही उनके वस्त्र हैं। उनके एक ही व्यसन है कि जहाँ श्रीरघुनाथजीकी चरित्र-कथा होती है वहाँ जाकर वे उसे अवश्य सुनते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 941 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रूप धरें जनु चारिउ बेदा। समदरसी मुनि बिगत बिभेदा।।
English explanation
It was as though all four Vedas had taken bodily form. These sages viewed all equally and were free from distinctions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रूप | साकार रूप | bodily form |
| धरें | धारण किए हुए | having assumed |
| जनु | मानो | as though |
| चारिउ | चारों | all four |
| बेदा | वेद | Vedas |
| समदरसी | सबको समान दृष्टि से देखने वाले | seeing all equally |
| मुनि | ऋषि | sages |
| बिगत | रहित | free from |
| बिभेदा | भेदभाव | distinctions |
2 आसा बसन ब्यसन यह तिन्हहीं। रघुपति चरित होइ तहँ सुनहीं।।
English explanation
The directions alone were their clothing. Their devoted pursuit was to listen wherever Rama’s deeds were recounted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आसा | दिशाएँ | the directions |
| बसन | वस्त्र | clothing |
| ब्यसन | लगन | devoted pursuit |
| यह | यह | this |
| तिन्हहीं | उनकी ही | their own |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu dynasty |
| चरित | चरित का कथन | accounts of his deeds |
| होइ | होता | took place |
| तहँ | वहाँ | there |
| सुनहीं | वे सुनते | they listened |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 941
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 941, 941
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।