उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानि समय सनकादिक आए। तेज पुंज गुन सील सुहाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसुअवसर जानकर सनकादि मुनि आये, जो तेजके पुञ्ज, सुन्दर गुण और शीलसे युक्त तथा सदा ब्रह्मानन्दमें लवलीन रहते हैं। देखनेमें तो वे बालक लगते हैं, परन्तु हैं बहुत समयके॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 941 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जानि समय सनकादिक आए। तेज पुंज गुन सील सुहाए।।
ब्रह्मानंद सदा लयलीना। देखत बालक बहुकालीना।।
स्रोत अभिलेख 7.32 · पुस्तक पृ. 941, 941
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जानि समय सनकादिक आए। तेज पुंज गुन सील सुहाए।।
English explanation
Recognizing the right moment, Sanaka and the other sages arrived. They were masses of radiance, adorned with virtues and noble character.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | जानकर | having recognized |
| समय | उचित समय | the right moment |
| सनकादिक | सनक आदि चार कुमार ऋषि | Sanaka and the other three Kumara sages |
| आए | आए | arrived |
| तेज | तेज | radiance |
| पुंज | पुंज | masses |
| गुन | सद्गुण | virtues |
| सील | सुशील स्वभाव | noble character |
| सुहाए | सुशोभित | adorned |
2 ब्रह्मानंद सदा लयलीना। देखत बालक बहुकालीना।।
English explanation
They were always absorbed in the bliss of Brahman. They looked like children, yet were of great antiquity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्मानंद | ब्रह्म का आनंद | the bliss of Brahman |
| सदा | सदा | always |
| लयलीना | पूर्णतः लीन | wholly absorbed |
| देखत | देखने में | in appearance |
| बालक | बालक | children |
| बहुकालीना | बहुत प्राचीन | of great antiquity |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 941
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 941, 941
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।