उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तव सरूप गारुड़ि रघुनायक। मोहि जिआयउ जन सुखदायक।।
मूल पाठ
तव सरूप गारुड़ि रघुनायक। मोहि जिआयउ जन सुखदायक।।
तव प्रसाद मम मोह नसाना। राम रहस्य अनूपम जाना।।
स्रोत अभिलेख 7.93 · पुस्तक पृ. 995, 995
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपके स्वरूपरूपी गारुड़ी (साँपका विष उतारनेवाले) के द्वारा भक्तोंको सुख देनेवाले श्रीरघुनाथजीने मुझे जिला लिया। आपकी कृपासे मेरा मोह नाश हो गया और मैंने श्रीरामजीका अनुपम रहस्य जाना॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 995 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तव सरूप गारुड़ि रघुनायक। मोहि जिआयउ जन सुखदायक।।
English explanation
Rama, who brings joy to his devotees, revived me by appearing in your form as a healer of snakebite.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | आपके | your |
| सरूप | रूप में | in the form |
| गारुड़ि | सर्प-विष उतारने वाला | a healer who removes snake venom |
| रघुनायक | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| मोहि | मुझे | me |
| जिआयउ | जीवित किया, नया जीवन दिया | revived; restored to life |
| जन | भक्तों को | to devotees |
| सुखदायक | सुख देने वाले | giver of joy |
2 तव प्रसाद मम मोह नसाना। राम रहस्य अनूपम जाना।।
English explanation
Through your grace, my delusion vanished, and I came to understand Rama’s matchless mystery.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | आपकी | your |
| प्रसाद | कृपा से | through grace |
| मम | मेरा | my |
| मोह | मोह, भ्रम | delusion |
| नसाना | नष्ट हो गया | vanished; was dispelled |
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| रहस्य | रहस्य, गूढ़ सत्य | mystery; profound truth |
| अनूपम | अनुपम, जिसकी तुलना नहीं | matchless; incomparable |
| जाना | जान लिया | came to understand |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.93
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 995
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 995, 995
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।