उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुर बिनु भव निधि तरइ न कोई। जौं बिरंचि संकर सम होई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दगुरुके बिना कोई भवसागर नहीं तर सकता, चाहे वह ब्रह्माजी और शंकरजीके समान ही क्यों न हो। [गरुडज़ीने कहा—] हे तात! मुझे सन्देहरूपी सर्पने डस लिया था और [साँपके डसनेपर जैसे विष चढऩेसे लहरें आती हैं, वैसे ही] बहुत-सी कुतर्करूपी दु:ख देनेवाली लहरें आ रही थीं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 995 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गुर बिनु भव निधि तरइ न कोई। जौं बिरंचि संकर सम होई।।
संसय सर्प ग्रसेउ मोहि ताता। दुखद लहरि कुतर्क बहु ब्राता।।
स्रोत अभिलेख 7.93 · पुस्तक पृ. 995, 995
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गुर बिनु भव निधि तरइ न कोई। जौं बिरंचि संकर सम होई।।
English explanation
Without a spiritual teacher, no one can cross the ocean of worldly existence, even if equal to Brahma or Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | spiritual teacher |
| बिनु | बिना | without |
| भव | संसार, जन्म-मरण का अस्तित्व | worldly existence; birth and death |
| निधि | सागर | ocean |
| तरइ | पार करता है | crosses |
| न | नहीं | not |
| कोई | कोई भी | anyone |
| जौं | चाहे, भले ही | even if |
| बिरंचि | ब्रह्मा, सृष्टिकर्ता देव | Brahma, the creator deity |
| संकर | शंकर, भगवान शिव | Shiva |
| सम | समान | equal to |
| होई | हो | may be |
2 संसय सर्प ग्रसेउ मोहि ताता। दुखद लहरि कुतर्क बहु ब्राता।।
English explanation
Garuda said: Dear one, the serpent of doubt had seized me, with many painful surges of faulty reasoning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संसय | संशय, संदेह | doubt |
| सर्प | साँप | serpent |
| ग्रसेउ | ग्रस लिया था | had swallowed; had seized |
| मोहि | मुझे | me |
| ताता | हे प्रिय, हे तात | dear one |
| दुखद | दुःख देने वाली | painful |
| लहरि | लहरें, पीड़ा के उभार | waves; surges of pain |
| कुतर्क | गलत तर्कों की | of faulty reasoning |
| बहु | अनेक | many |
| ब्राता | समूह, ढेर | multitudes; hosts |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.93
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 995
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 995, 995
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।