उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब हनुमंत नाइ पद माथा। कहे सकल रघुपति गुन गाथा।।
मूल पाठ
तब हनुमंत नाइ पद माथा। कहे सकल रघुपति गुन गाथा।।
कहु कपि कबहुँ कृपाल गोसाईं। सुमिरहिं मोहि दास की नाईं।।
स्रोत अभिलेख 7.2 · पुस्तक पृ. 907, 908
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब हनुमान्जीने भरतजीके चरणोंमें मस्तक नवाकर श्रीरघुनाथजीकी सारी गुणगाथा कही। [भरतजीने पूछा—] हे हनुमान्! कहो, कृपालु स्वामी श्रीरामचन्द्रजी कभी मुझे अपने दासकी तरह याद भी करते हैं?॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 908 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब हनुमंत नाइ पद माथा। कहे सकल रघुपति गुन गाथा।।
English explanation
Then Hanuman bowed his head at Bharata’s feet and recounted the whole tale of Rama’s virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| हनुमंत | हनुमान | Hanuman, Rama’s servant |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| पद | चरणों में | at the feet |
| माथा | सिर | head |
| कहे | सुनाए | recounted |
| सकल | समस्त | all |
| रघुपति | रघुनाथ राम के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| गुन | गुणों की | of virtues |
| गाथा | कथा | tale |
2 कहु कपि कबहुँ कृपाल गोसाईं। सुमिरहिं मोहि दास की नाईं।।
English explanation
Tell me, Hanuman: does the compassionate Lord ever remember me as his servant?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहु | बताइए | tell me |
| कपि | हे वानर हनुमान | O Hanuman |
| कबहुँ | कभी | ever |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| गोसाईं | स्वामी राम | Lord Rama |
| सुमिरहिं | याद करते हैं | remembers |
| मोहि | मुझे | me |
| दास | सेवक | servant |
| की | के | of a |
| नाईं | रूप में | as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 908
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 907, 908
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