उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि संदेस सरिस जग माहीं। करि बिचार देखेउँ कछु नाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस सन्देशके समान (इसके बदलेमें देने लायक पदार्थ) जगत्में कुछ भी नहीं है, मैंने यह विचार कर देख लिया है। [इसलिये] हे तात! मैं तुमसे किसी प्रकार भी उऋण नहीं हो सकता। अब मुझे प्रभुका चरित्र (हाल) सुनाओ॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 908 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एहि संदेस सरिस जग माहीं। करि बिचार देखेउँ कछु नाहीं।।
नाहिन तात उरिन मैं तोही। अब प्रभु चरित सुनावहु मोही।।
स्रोत अभिलेख 7.2 · पुस्तक पृ. 907, 908
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एहि संदेस सरिस जग माहीं। करि बिचार देखेउँ कछु नाहीं।।
English explanation
After reflecting, I find nothing in the world equal to this message.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| संदेस | संदेश के | message |
| सरिस | बराबर | equal to |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| करि | करके | having done |
| बिचार | विचार | reflection |
| देखेउँ | मैंने देखा | I have found |
| कछु | कुछ भी | anything |
| नाहीं | नहीं | not |
2 नाहिन तात उरिन मैं तोही। अब प्रभु चरित सुनावहु मोही।।
English explanation
Dear one, I remain indebted to you. Now tell me of Lord Rama’s deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाहिन | नहीं हूँ | am not |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| उरिन | ऋण से मुक्त | free of debt |
| मैं | मैं | I |
| तोही | आपके प्रति | to you |
| अब | अब | now |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| चरित | चरित | deeds |
| सुनावहु | सुनाइए | recount |
| मोही | मुझे | to me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 908
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 907, 908
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।