उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कपि तव दरस सकल दुख बीते। मिले आजु मोहि राम पिरीते।।
मूल पाठ
कपि तव दरस सकल दुख बीते। मिले आजु मोहि राम पिरीते।।
बार बार बूझी कुसलाता। तो कहुँ देउँ काह सुनु भ्राता।।
स्रोत अभिलेख 7.2 · पुस्तक पृ. 907, 908
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[भरतजीने कहा—] हे हनुमान्! तुम्हारे दर्शनसे मेरे समस्त दु:ख समाप्त हो गये (दु:खोंका अन्त हो गया)। [तुम्हारे रूपमें] आज मुझे प्यारे रामजी ही मिल गये। भरतजीने बार-बार कुशल पूछी [और कहा—] हे भाई! सुनो, [इस शुभ संवादके बदलेमें] तुम्हें क्या दूँ?॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 908 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कपि तव दरस सकल दुख बीते। मिले आजु मोहि राम पिरीते।।
English explanation
O Hanuman, seeing you has ended all my sorrow. Today it is as though I have met my beloved Rama himself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपि | हे वानर हनुमान | O Hanuman, monkey hero |
| तव | आपके | your |
| दरस | दर्शन से | through seeing |
| सकल | सारे | all |
| दुख | दुख | sorrows |
| बीते | दूर हो गए | have passed away |
| मिले | मिल गए | have met |
| आजु | आज | today |
| मोहि | मुझे | to me |
| राम | राम | Rama, Bharata’s elder brother |
| पिरीते | प्रिय | beloved |
2 बार बार बूझी कुसलाता। तो कहुँ देउँ काह सुनु भ्राता।।
English explanation
Bharata repeatedly asked about their welfare and said, “Listen, brother, what can I give you?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार | after time |
| बूझी | पूछी | asked about |
| कुसलाता | कुशल-क्षेम | welfare |
| तो | आप | you |
| कहुँ | को | to |
| देउँ | मैं दूँ | shall I give |
| काह | क्या | what |
| सुनु | सुनिए | listen |
| भ्राता | हे भाई | O brother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 908
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 907, 908
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।