उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब सुग्रीव चरन गहि नाना। भाँति बिनय कीन्हे हनुमाना।।
मूल पाठ
तब सुग्रीव चरन गहि नाना। भाँति बिनय कीन्हे हनुमाना।।
दिन दस करि रघुपति पद सेवा। पुनि तव चरन देखिहउँ देवा।।
स्रोत अभिलेख 7.19 · पुस्तक पृ. 928, 929
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब हनुमान्जीने सुग्रीवके चरण पकड़कर अनेक प्रकारसे विनती की और कहा—हे देव! दस (कुछ) दिन श्रीरघुनाथजीकी चरणसेवा करके फिर मैं आकर आपके चरणोंके दर्शन करूँगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 929 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब सुग्रीव चरन गहि नाना। भाँति बिनय कीन्हे हनुमाना।।
English explanation
Then Hanuman clasped Sugriva’s feet and pleaded with him in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| सुग्रीव | वानरराज सुग्रीव के | of Sugriva, king of the monkeys |
| चरन | चरण | feet |
| गहि | पकड़कर | clasping |
| नाना | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| बिनय | विनती | entreaties |
| कीन्हे | कीं | made |
| हनुमाना | हनुमान ने | Hanuman |
2 दिन दस करि रघुपति पद सेवा। पुनि तव चरन देखिहउँ देवा।।
English explanation
My lord, after serving Rama’s feet for ten days, I shall return to behold your feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दिन | दिन | days |
| दस | दस | ten |
| करि | करके | having performed |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu’s line |
| पद | चरणों की | of the feet |
| सेवा | सेवा | service |
| पुनि | फिर | then; again |
| तव | आपके | your |
| चरन | चरण | feet |
| देखिहउँ | मैं दर्शन करूँगा | I shall behold |
| देवा | हे स्वामी | my lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 929
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 928, 929
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।