उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुन्य पुंज तुम्ह पवनकुमारा। सेवहु जाइ कृपा आगारा।।
मूल पाठ
पुन्य पुंज तुम्ह पवनकुमारा। सेवहु जाइ कृपा आगारा।।
अस कहि कपि सब चले तुरंता। अंगद कहइ सुनहु हनुमंता।।
स्रोत अभिलेख 7.19 · पुस्तक पृ. 928, 929
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[सुग्रीवने कहा—] हे पवनकुमार! तुम पुण्यकी राशि हो [जो भगवान्ने तुमको अपनी सेवामें रख लिया]। जाकर कृपाधाम श्रीरामजीकी सेवा करो। सब वानर ऐसा कहकर तुरंत चल पड़े। अङ्गदने कहा—हे हनुमान्! सुनो—॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 929 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुन्य पुंज तुम्ह पवनकुमारा। सेवहु जाइ कृपा आगारा।।
English explanation
Son of the Wind, you are an embodiment of merit; go and serve Rama, the abode of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुन्य | पुण्य; सत्कर्मों का फल | merit; virtue |
| पुंज | पुंज; राशि | a mass; embodiment |
| तुम्ह | तुम | you |
| पवनकुमारा | हे पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the Wind |
| सेवहु | सेवा करो | serve |
| जाइ | जाकर | going; go and |
| कृपा | कृपा के | of compassion |
| आगारा | धाम; आश्रय राम | the abode, Rama |
2 अस कहि कपि सब चले तुरंता। अंगद कहइ सुनहु हनुमंता।।
English explanation
Having said this, all the monkeys departed at once. Angada said, ‘Listen, Hanuman.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| कपि | वानर | monkeys |
| सब | सब | all |
| चले | चल दिए | departed |
| तुरंता | तुरंत | at once |
| अंगद | बालिपुत्र अंगद | Angada, son of Vali |
| कहइ | कहते हैं | says |
| सुनहु | सुनो | listen |
| हनुमंता | हे हनुमान | Hanuman |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 929
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 928, 929
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।