उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु रुख देखि बिनय बहु भाषी। चलेउ हृदयँ पद पंकज राखी।।
मूल पाठ
प्रभु रुख देखि बिनय बहु भाषी। चलेउ हृदयँ पद पंकज राखी।।
अति आदर सब कपि पहुँचाए। भाइन्ह सहित भरत पुनि आए।।
स्रोत अभिलेख 7.19 · पुस्तक पृ. 928, 929
भावार्थ
मूल पाठ के बादकिन्तु प्रभुका रुख देखकर, बहुत-से विनयवचन कहकर तथा हृदयमें चरण-कमलोंको रखकर वे चले। अत्यन्त आदरके साथ सब वानरोंको पहुँचाकर भाइयोंसहित भरतजी लौट आये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 929 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रभु रुख देखि बिनय बहु भाषी। चलेउ हृदयँ पद पंकज राखी।।
English explanation
Seeing the Lord’s disposition, Angada made many humble entreaties and departed, holding his lotus feet in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | the Lord, Rama |
| रुख | रुख; अभिप्राय | disposition; intention |
| देखि | देखकर | seeing |
| बिनय | विनम्र निवेदन | humble entreaties |
| बहु | बहुत | many |
| भाषी | कहीं; व्यक्त कीं | uttered; expressed |
| चलेउ | चल दिए | departed |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| पद | चरण | feet |
| पंकज | कमल | lotuses |
| राखी | रखकर | having placed |
2 अति आदर सब कपि पहुँचाए। भाइन्ह सहित भरत पुनि आए।।
English explanation
Bharata saw all the monkeys off with great respect, then returned with his brothers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | बहुत; अत्यंत | great; very |
| आदर | आदर से | with respect |
| सब | सभी | all |
| कपि | वानरों को | the monkeys |
| पहुँचाए | विदा करके पहुँचाया | escorted on their departure |
| भाइन्ह | भाइयों के | his brothers |
| सहित | साथ | with |
| भरत | श्रीराम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| पुनि | फिर | then |
| आए | लौट आए | returned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 929
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 928, 929
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