उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बार बार कर दंड प्रनामा। मन अस रहन कहहिं मोहि रामा।।
मूल पाठ
बार बार कर दंड प्रनामा। मन अस रहन कहहिं मोहि रामा।।
राम बिलोकनि बोलनि चलनी। सुमिरि सुमिरि सोचत हँसि मिलनी।।
स्रोत अभिलेख 7.19 · पुस्तक पृ. 928, 929
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर बार-बार दण्डवत्-प्रणाम करते हैं। मनमें ऐसा आता है कि श्रीरामजी मुझे रहनेको कह दें। वे श्रीरामजीके देखनेकी, बोलनेकी, चलनेकी तथा हँसकर मिलनेकी रीतिको याद कर-करके सोचते हैं (दुखी होते हैं)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 928 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बार बार कर दंड प्रनामा। मन अस रहन कहहिं मोहि रामा।।
English explanation
Angada repeatedly prostrates himself, hoping inwardly that Rama will ask him to stay.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार | after time |
| कर | करते हैं | performs |
| दंड | दंडवत; शरीर सीधा भूमि पर रखकर | prostrate, stretched out on the ground |
| प्रनामा | प्रणाम | obeisance |
| मन | मन में | in his mind |
| अस | ऐसी आशा | such a hope |
| रहन | रहने को | to stay |
| कहहिं | कहें | may ask |
| मोहि | मुझसे; मुझे | me |
| रामा | श्रीराम | Rama |
2 राम बिलोकनि बोलनि चलनी। सुमिरि सुमिरि सोचत हँसि मिलनी।।
English explanation
Remembering again and again Rama’s gaze, speech, gait, and smiling welcome, Angada grieves.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम की | Rama’s |
| बिलोकनि | देखने की रीति; दृष्टि | manner of looking; gaze |
| बोलनि | बोलने की रीति; वाणी | manner of speaking; speech |
| चलनी | चलने की रीति; चाल | manner of walking; gait |
| सुमिरि | याद करके | remembering |
| सुमिरि | फिर याद करके | remembering again |
| सोचत | दुखी होते हैं | grieves |
| हँसि | हँसकर; मुस्कराकर | with a smile |
| मिलनी | मिलने की रीति | manner of greeting |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 928
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 928, 929
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।