उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरत अनुज सौमित्र समेता। पठवन चले भगत कृत चेता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभक्तकी करनीको याद करके भरतजी छोटे भाई शत्रुघ्रजी और लक्ष्मणजीसहित उनको पहुँचाने चले। अङ्गदके हृदयमें थोड़ा प्रेम नहीं है (अर्थात् बहुत अधिक प्रेम है)। वे फिर-फिरकर श्रीरामजीकी ओर देखते हैं,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 928 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भरत अनुज सौमित्र समेता। पठवन चले भगत कृत चेता।।
अंगद हृदयँ प्रेम नहिं थोरा। फिरि फिरि चितव राम कीं ओरा।।
स्रोत अभिलेख 7.19 · पुस्तक पृ. 928, 929
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भरत अनुज सौमित्र समेता। पठवन चले भगत कृत चेता।।
English explanation
Bharata, together with his younger brother Shatrughna and Lakshmana, went to see the devotees off, mindful of them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | श्रीराम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| अनुज | छोटे भाई शत्रुघ्न | his younger brother Shatrughna |
| सौमित्र | सुमित्रापुत्र लक्ष्मण | Lakshmana, son of Sumitra |
| समेता | सहित | together with |
| पठवन | विदा करने | to see them off |
| चले | चले | set out |
| भगत | भक्तों के प्रति | toward the devotees |
| कृत | किया हुआ | made; directed |
| चेता | ध्यान; सजग चित्त | attention; a mindful heart |
2 अंगद हृदयँ प्रेम नहिं थोरा। फिरि फिरि चितव राम कीं ओरा।।
English explanation
Angada’s heart held no little love; he kept looking back toward Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंगद | बालिपुत्र अंगद | Angada, son of Vali |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| प्रेम | प्रेम | love |
| नहिं | नहीं | not |
| थोरा | थोड़ा; कम | little; slight |
| फिरि | फिर | again |
| फिरि | फिर | again |
| चितव | देखते हैं | looks |
| राम | श्रीराम | Rama |
| कीं | की | of; toward |
| ओरा | ओर; दिशा | direction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 928
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 928, 929
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।