उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब मैं निर्गुन मत कर दूरी। सगुन निरूपउँ करि हठ भूरी।।
मूल पाठ
तब मैं निर्गुन मत कर दूरी। सगुन निरूपउँ करि हठ भूरी।।
उत्तर प्रतिउत्तर मैं कीन्हा। मुनि तन भए क्रोध के चीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 7.111 · पुस्तक पृ. 1016, 1018
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब मैं निर्गुण मतको हटाकर (काटकर) बहुत हठ करके सगुणका निरूपण करने लगा। मैंने उत्तर-प्रत्युत्तर किया, इससे मुनिके शरीरमें क्रोधके चिह्न उत्पन्न हो गये॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1017 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब मैं निर्गुन मत कर दूरी। सगुन निरूपउँ करि हठ भूरी।।
English explanation
Then I set aside the doctrine of the attributeless and expounded the divine with attributes with great insistence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| मैं | मैंने | I |
| निर्गुन | गुणरहित ब्रह्म का | of attributeless Brahman |
| मत | मत | doctrine |
| कर | करके | putting |
| दूरी | दूर; अलग | aside |
| सगुन | गुणयुक्त ईश्वर का | the divine with attributes |
| निरूपउँ | मैं निरूपण करने लगा | I proceeded to expound |
| करि | करके | with |
| हठ | हठ; आग्रह | insistence |
| भूरी | बहुत | great |
2 उत्तर प्रतिउत्तर मैं कीन्हा। मुनि तन भए क्रोध के चीन्हा।।
English explanation
I gave replies and counter-replies; signs of anger appeared on the sage’s body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उत्तर | उत्तर | replies |
| प्रतिउत्तर | प्रतिउत्तर; जवाब के जवाब | counter-replies |
| मैं | मैंने | I |
| कीन्हा | दिए; किए | gave |
| मुनि | मुनि के | the sage’s |
| तन | शरीर पर | on the body |
| भए | प्रकट हुए | appeared |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| के | के | of |
| चीन्हा | चिह्न | signs |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1017
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1016, 1018
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