उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु प्रभु बहुत अवग्या किएँ। उपज क्रोध ग्यानिन्ह के हिएँ।।
मूल पाठ
सुनु प्रभु बहुत अवग्या किएँ। उपज क्रोध ग्यानिन्ह के हिएँ।।
अति संघरषन जौं कर कोई। अनल प्रगट चंदन ते होई।।
स्रोत अभिलेख 7.111 · पुस्तक पृ. 1016, 1018
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे प्रभो! सुनिये, बहुत अपमान करनेपर ज्ञानीके भी हृदयमें क्रोध उत्पन्न हो जाता है। यदि कोई चन्दनकी लकड़ीको बहुत अधिक रगड़े, तो उससे भी अग्रि प्रकट हो जायगी॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1018 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनु प्रभु बहुत अवग्या किएँ। उपज क्रोध ग्यानिन्ह के हिएँ।।
English explanation
Listen, my lord: when treated with great disrespect, even the wise develop anger in their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनिए | listen |
| प्रभु | हे प्रभु; हे गरुड़ | my lord, Garuda |
| बहुत | बहुत | great |
| अवग्या | अवज्ञा; अनादर | disrespect |
| किएँ | किए जाने पर | when committed |
| उपज | उत्पन्न होता है | arises |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| ग्यानिन्ह | ज्ञानियों | the wise |
| के | के | of |
| हिएँ | हृदय में | in the heart |
2 अति संघरषन जौं कर कोई। अनल प्रगट चंदन ते होई।।
English explanation
If someone rubs it intensely, fire emerges even from sandalwood.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | बहुत अधिक | intense |
| संघरषन | घर्षण; रगड़ | friction; rubbing |
| जौं | यदि | if |
| कर | करे | does |
| कोई | कोई | someone |
| अनल | अग्नि | fire |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| चंदन | चंदन | sandalwood |
| ते | से | from |
| होई | हो जाती है | becomes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1018
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1016, 1018
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।