उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब मुनिष रघुपति गुन गाथा। कहे कछुक सादर खगनाथा।।
मूल पाठ
तब मुनिष रघुपति गुन गाथा। कहे कछुक सादर खगनाथा।।
ब्रह्मग्यान रत मुनि बिग्यानि। मोहि परम अधिकारी जानी।।
स्रोत अभिलेख 7.111 · पुस्तक पृ. 1016, 1018
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब हे पक्षिराज! मुनीश्वरने श्रीरघुनाथजीके गुणोंकी कुछ कथाएँ आदरसहित कहीं। फिर वे ब्रह्मज्ञानपरायण विज्ञानवान् मुनि मुझे परम अधिकारी जानकर—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1016 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तब मुनिष रघुपति गुन गाथा। कहे कछुक सादर खगनाथा।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: Then the sage respectfully related some accounts of Rama’s virtues, O king of birds!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| मुनिष | मुनि ने | the sage |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| गुन | गुणों की | of the virtues |
| गाथा | कथाएँ | accounts |
| कहे | कहीं | related |
| कछुक | कुछ | some |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| खगनाथा | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
2 ब्रह्मग्यान रत मुनि बिग्यानि। मोहि परम अधिकारी जानी।।
English explanation
The sage, absorbed in knowledge of Brahman and endowed with realized understanding, considered me eminently qualified for it…
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्मग्यान | ब्रह्म के ज्ञान में | in knowledge of Brahman |
| रत | लीन | absorbed |
| मुनि | मुनि | the sage |
| बिग्यानि | अनुभवसिद्ध ज्ञानी | possessing realized understanding |
| मोहि | मुझे | me |
| परम | अत्यंत | eminently |
| अधिकारी | योग्य पात्र | a qualified recipient |
| जानी | जानकर | considering |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.111
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1016
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1016, 1018
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।