उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब ते मोहि न ब्यापी माया। जब ते रघुनायक अपनाया।।
मूल पाठ
तब ते मोहि न ब्यापी माया। जब ते रघुनायक अपनाया।।
यह सब गुप्त चरित मैं गावा। हरि मायाँ जिमि मोहि नचावा।।
स्रोत अभिलेख 7.89 · पुस्तक पृ. 991, 991
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार जबसे श्रीरघुनाथजीने मुझको अपनाया, तबसे मुझे माया कभी नहीं व्यापी। श्रीहरिकी मायाने मुझे जैसे नचाया, वह सब गुप्त चरित्र मैंने कहा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 991 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तब ते मोहि न ब्यापी माया। जब ते रघुनायक अपनाया।।
English explanation
Ever since Rama, the lord of Raghu’s lineage, accepted me as his own, Maya has not held sway over me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | that time |
| ते | से | since |
| मोहि | मुझे | me |
| न | नहीं | not |
| ब्यापी | व्याप्त हुई, वश में किया | held sway over |
| माया | माया, मोहकारी शक्ति | Maya, the power of delusion |
| जब | जब | the time when |
| ते | से | since |
| रघुनायक | रघुकुल के स्वामी राम ने | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| अपनाया | मुझे अपना लिया | accepted me as his own |
2 यह सब गुप्त चरित मैं गावा। हरि मायाँ जिमि मोहि नचावा।।
English explanation
I have recounted this entire hidden episode—how Hari’s Maya made me dance to its bidding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| सब | सारा | entire |
| गुप्त | गुप्त, अप्रकट | hidden; unrevealed |
| चरित | चरित, घटनावृत्त | account of events |
| मैं | मैंने | I |
| गावा | गाकर सुनाया | sang; recounted |
| हरि | हरि की | Hari’s |
| मायाँ | माया ने | Maya, the deluding power |
| जिमि | जिस प्रकार | how; in the way that |
| मोहि | मुझे | me |
| नचावा | नचाया, अपने वश में चलाया | made dance; directed at its bidding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.89
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 991
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 991, 991
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