उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मैं पुनि अवध रहेउँ कछु काला। देखेउँ बालबिनोद रसाला।।
मूल पाठ
मैं पुनि अवध रहेउँ कछु काला। देखेउँ बालबिनोद रसाला।।
राम प्रसाद भगति बर पायउँ। प्रभु पद बंदि निजाश्रम आयउँ।।
स्रोत अभिलेख 7.89 · पुस्तक पृ. 991, 991
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं और कुछ समयतक अवधपुरीमें रहा और मैंने श्रीरामजीकी रसीली बाललीलाएँ देखीं। श्रीरामजीकी कृपासे मैंने भक्तिका वरदान पाया। तदनन्तर प्रभुके चरणोंकी वन्दना करके मैं अपने आश्रमपर लौट आया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 991 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मैं पुनि अवध रहेउँ कछु काला। देखेउँ बालबिनोद रसाला।।
English explanation
AI-generated draft: I then stayed in Ayodhya for some time and witnessed Rama’s delightful childhood play.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं, काकभुशुंडि | I, Kakabhushundi |
| पुनि | फिर | then; again |
| अवध | अयोध्या में | in Ayodhya |
| रहेउँ | रहा | stayed |
| कछु | कुछ | some |
| काला | समय | time |
| देखेउँ | मैंने देखा | I witnessed |
| बालबिनोद | राम की बाललीलाएँ | Rama’s childhood play |
| रसाला | रसपूर्ण, आनंददायक | delightful; full of charm |
2 राम प्रसाद भगति बर पायउँ। प्रभु पद बंदि निजाश्रम आयउँ।।
English explanation
By Rama’s grace I received the boon of devotion; bowing at the Lord’s feet, I returned to my own hermitage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम की | Rama’s |
| प्रसाद | कृपा से | by grace |
| भगति | भक्ति का | of devotion |
| बर | वरदान | boon |
| पायउँ | मैंने पाया | I received |
| प्रभु | प्रभु के | the Lord’s |
| पद | चरण | feet |
| बंदि | वंदना करके | having bowed to |
| निजाश्रम | अपने आश्रम में | to my own hermitage |
| आयउँ | मैं लौट आया | I returned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.89
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 991
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 991, 991
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।