उत्तरकाण्ड · सोरठा 88 (ख) · सोरठा
सोई सुख लवलेस जिन्ह बारक सपनेहुँ लहेउ।
सोई सुख लवलेस जिन्ह बारक सपनेहुँ लहेउ।
ते नहिं गनहिं खगेस ब्रह्मसुखहि सज्जन सुमति॥ ८८ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.88 · पुस्तक पृ. 990, 990
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सोई सुख लवलेस जिन्ह बारक सपनेहुँ लहेउ।
जिन्होंने उसी सुख का अत्यंत छोटा अंश भी एक बार स्वप्न में भी पा लिया—
English explanation
Those who have obtained even the tiniest trace of that bliss, even once in a dream—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोई | वही; उसी | that very same |
| सुख | सुख; आनंद | bliss |
| लवलेस | अत्यंत छोटा अंश | the tiniest trace |
| जिन्ह | जिन्होंने | those who |
| बारक | एक बार भी | even once |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| लहेउ | पाया; प्राप्त किया | obtained; experienced |
2ते नहिं गनहिं खगेस ब्रह्मसुखहि सज्जन सुमति॥ ८८ (ख)॥
हे पक्षिराज गरुड़, वे सद्बुद्धि वाले सज्जन ब्रह्मानंद को भी कुछ नहीं गिनते।
English explanation
O Garuda, king of birds, those virtuous people of sound understanding count even the bliss of Brahman as nothing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | those people |
| नहिं | नहीं | not |
| गनहिं | महत्त्व देते; कुछ गिनते | reckon as significant |
| खगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| ब्रह्मसुखहि | ब्रह्मानंद को | the bliss of Brahman |
| सज्जन | सज्जन; भले लोग | virtuous people |
| सुमति | सद्बुद्धि वाले | of sound understanding |
| ख | दोहा ८८ के दूसरे भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the second part of verse 88 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- सोरठा 88 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.88
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 990, 990
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