उत्तरकाण्ड · दोहा 89 (क) · दोहा/सोरठा
बिनु गुर होइ कि ग्यान ग्यान कि होइ बिराग बिनु।
बिनु गुर होइ कि ग्यान ग्यान कि होइ बिराग बिनु।
गावहिं बेद पुरान सुख कि लहिअ हरि भगति बिनु।।89(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.89 · पुस्तक पृ. 991, 991
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बिनु गुर होइ कि ग्यान ग्यान कि होइ बिराग बिनु।
क्या गुरु के बिना ज्ञान हो सकता है? क्या वैराग्य के बिना ज्ञान हो सकता है?
English explanation
Can knowledge arise without a teacher? Can knowledge arise without dispassion?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| गुर | गुरु के | a spiritual teacher |
| होइ | हो सकता है | can arise |
| कि | क्या | can? |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| कि | क्या | can? |
| होइ | हो सकता है | can arise |
| बिराग | वैराग्य के | dispassion; detachment |
| बिनु | बिना | without |
2गावहिं बेद पुरान सुख कि लहिअ हरि भगति बिनु।।89(क)।।
वेद और पुराण कहते हैं: क्या हरि की भक्ति के बिना सुख पाया जा सकता है?
English explanation
The Vedas and Puranas proclaim: can happiness be attained without devotion to Hari?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गावहिं | गाते हैं, कहते हैं | sing; proclaim |
| बेद | वेद | the Vedas |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
| सुख | सुख | happiness |
| कि | क्या | can? |
| लहिअ | पाया जा सकता है | be attained |
| हरि | हरि की | to Hari |
| भगति | भक्ति | devotion |
| बिनु | बिना | without |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse-reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 89 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.89
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 991, 991
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