उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज अनुभव अब कहउँ खगेसा। बिनु हरि भजन न जाहि कलेसा।।
मूल पाठ
निज अनुभव अब कहउँ खगेसा। बिनु हरि भजन न जाहि कलेसा।।
राम कृपा बिनु सुनु खगराई। जानि न जाइ राम प्रभुताई।।
स्रोत अभिलेख 7.89 · पुस्तक पृ. 991, 991
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पक्षिराज गरुड़! अब मैं आपसे अपना निजी अनुभव कहता हूँ। [वह यह है कि] भगवान्के भजन बिना क्लेश दूर नहीं होते। हे पक्षिराज! सुनिये, श्रीरामजीकी कृपा बिना श्रीरामजीकी प्रभुता नहीं जानी जाती;॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 991 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 निज अनुभव अब कहउँ खगेसा। बिनु हरि भजन न जाहि कलेसा।।
English explanation
O Garuda, king of birds, I now tell you my own experience: afflictions do not cease without devotion to Hari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपना | my own |
| अनुभव | अनुभव | experience |
| अब | अब | now |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I tell |
| खगेसा | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| बिनु | बिना | without |
| हरि | हरि, भगवान राम का | of Hari, here Rama |
| भजन | भजन, भक्तिपूर्ण स्मरण | devotional worship and remembrance |
| न | नहीं | not |
| जाहि | दूर होते | go away; cease |
| कलेसा | क्लेश, दुःख | afflictions; sorrows |
2 राम कृपा बिनु सुनु खगराई। जानि न जाइ राम प्रभुताई।।
English explanation
Listen, O king of birds: without Rama’s grace, his sovereign greatness cannot be known.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम की | Rama’s |
| कृपा | कृपा | grace |
| बिनु | बिना | without |
| सुनु | सुनो | listen |
| खगराई | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| जानि | जानी | known |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकती | can be |
| राम | राम की | Rama’s |
| प्रभुताई | प्रभुता, ईश्वरीय महिमा | sovereign greatness; divine majesty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.89
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 991
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 991, 991
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।