उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब तब अवधपुरी मैं ज़ाऊँ। बालचरित बिलोकि हरषाऊँ।।
मूल पाठ
तब तब अवधपुरी मैं ज़ाऊँ। बालचरित बिलोकि हरषाऊँ।।
जन्म महोत्सव देखउँ जाई। बरष पाँच तहँ रहउँ लोभाई।।
स्रोत अभिलेख 7.75 · पुस्तक पृ. 978, 979
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब-तब मैं अयोध्यापुरी जाता हूँ और उनकी बाललीला देखकर हर्षित होता हूँ। वहाँ जाकर मैं जन्ममहोत्सव देखता हूँ और [भगवान्की शिशुलीलामें] लुभाकर पाँच वर्षतक वहीं रहता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 978 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब तब अवधपुरी मैं ज़ाऊँ। बालचरित बिलोकि हरषाऊँ।।
English explanation
Each time, I go to Ayodhya and rejoice on seeing Rama’s childhood deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| तब | हर उस बार | each such time |
| अवधपुरी | अयोध्या नगरी | the city of Ayodhya |
| मैं | मैं | I |
| ज़ाऊँ | जाता हूँ | go |
| बालचरित | बाल्यकाल की लीलाएँ | childhood deeds |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| हरषाऊँ | आनंदित होता हूँ | rejoice |
2 जन्म महोत्सव देखउँ जाई। बरष पाँच तहँ रहउँ लोभाई।।
English explanation
I go there to see the great birth celebration and, captivated, stay there for five years.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जन्म | जन्म का | of the birth |
| महोत्सव | महान उत्सव | great celebration |
| देखउँ | मैं देखता हूँ | I see |
| जाई | जाकर | having gone |
| बरष | वर्ष | years |
| पाँच | पाँच | five |
| तहँ | वहाँ | there |
| रहउँ | मैं रहता हूँ | I stay |
| लोभाई | आकर्षित होकर | being captivated |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.75
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 978
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 978, 979
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।