उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम कृपा आपनि जड़ताई। कहउँ खगेस सुनहु मन लाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे पक्षिराज गरुडज़ी! श्रीरामजीकी कृपा और अपनी जड़ता (मूर्खता) की बात कहता हूँ, मन लगाकर सुनिये। जब-जब श्रीरामचन्द्रजी मनुष्यशरीर धारण करते हैं और भक्तोंके लिये बहुत-सी लीलाएँ करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 978 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम कृपा आपनि जड़ताई। कहउँ खगेस सुनहु मन लाई।।
जब जब राम मनुज तनु धरहीं। भक्त हेतु लीला बहु करहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.75 · पुस्तक पृ. 978, 979
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम कृपा आपनि जड़ताई। कहउँ खगेस सुनहु मन लाई।।
English explanation
I recount Rama’s grace and my own dullness; O Garuda, king of birds, listen attentively.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कृपा | कृपा | grace |
| आपनि | अपनी | my own |
| जड़ताई | जड़ता; समझ की कमी | dullness; lack of understanding |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I recount |
| खगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| मन | मन | mind; attention |
| लाई | लगाकर | focusing |
2 जब जब राम मनुज तनु धरहीं। भक्त हेतु लीला बहु करहीं।।
English explanation
Whenever Rama assumes a human body, he performs many divine plays for his devotees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| जब | जब भी | whenever |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| मनुज | मनुष्य का | human |
| तनु | शरीर | body |
| धरहीं | धारण करते हैं | assumes |
| भक्त | भक्तों के | devotees |
| हेतु | लिए | for the sake of |
| लीला | लीलाएँ | divine plays |
| बहु | अनेक | many |
| करहीं | करते हैं | performs |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.75
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 978
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 978, 979
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।