उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इष्टदेव मम बालक रामा। सोभा बपुष कोटि सत कामा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबालकरूप श्रीरामचन्द्रजी मेरे इष्टदेव हैं, जिनके शरीरमें अरबों कामदेवोंकी शोभा है। हे गरुडज़ी! अपने प्रभुका मुख देख-देखकर मैं नेत्रोंको सफल करता हूँ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 978 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
इष्टदेव मम बालक रामा। सोभा बपुष कोटि सत कामा।।
निज प्रभु बदन निहारि निहारी। लोचन सुफल करउँ उरगारी।।
स्रोत अभिलेख 7.75 · पुस्तक पृ. 978, 979
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 इष्टदेव मम बालक रामा। सोभा बपुष कोटि सत कामा।।
English explanation
The child Rama is my chosen deity; his bodily beauty equals that of a billion gods of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इष्टदेव | आराध्य देव | chosen deity |
| मम | मेरे | my |
| बालक | बालरूप में | in child form |
| रामा | भगवान राम | Lord Rama |
| सोभा | सुंदरता | beauty |
| बपुष | शरीर की | of the body |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| सत | सौ | a hundred |
| कामा | कामदेवों के | gods of love |
2 निज प्रभु बदन निहारि निहारी। लोचन सुफल करउँ उरगारी।।
English explanation
O Garuda, by gazing repeatedly at my Lord’s face, I fulfill the purpose of my eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | my own |
| प्रभु | प्रभु का | Lord’s |
| बदन | मुख | face |
| निहारि | देखकर | gazing |
| निहारी | बार-बार देखकर | gazing again |
| लोचन | नेत्रों को | my eyes |
| सुफल | सार्थक | fulfilled in purpose |
| करउँ | मैं करता हूँ | I make |
| उरगारी | हे सर्पों के शत्रु गरुड़ | O Garuda, enemy of serpents |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.75
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 978
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 978, 979
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।