उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लघु बायस बपु धरि हरि संगा। देखउँ बालचरित बहुरंगा।।
मूल पाठ
लघु बायस बपु धरि हरि संगा। देखउँ बालचरित बहुरंगा।।
स्रोत अभिलेख 7.75 · पुस्तक पृ. 978, 979
भावार्थ
मूल पाठ के बादछोटे-से कौएका शरीर धरकर और भगवान्के साथ-साथ फिरकर मैं उनके भाँति-भाँतिके बालचरित्रोंको देखा करता हूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 978 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लघु बायस बपु धरि हरि संगा। देखउँ बालचरित बहुरंगा।।
English explanation
Taking the body of a small crow and staying with Rama, I watch his varied childhood deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लघु | छोटे | small |
| बायस | कौए का | a crow’s |
| बपु | शरीर | body |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| हरि | भगवान राम के | Lord Rama |
| संगा | साथ | with |
| देखउँ | मैं देखता हूँ | I watch |
| बालचरित | बाल्यकाल की लीलाएँ | childhood deeds |
| बहुरंगा | अनेक प्रकार की | of many kinds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.75
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 978
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 978, 979
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।