उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तजउँ न तन निज इच्छा मरना। तन बिनु बेद भजन नहिं बरना।।
मूल पाठ
तजउँ न तन निज इच्छा मरना। तन बिनु बेद भजन नहिं बरना।।
प्रथम मोहँ मोहि बहुत बिगोवा। राम बिमुख सुख कबहुँ न सोवा।।
स्रोत अभिलेख 7.96 · पुस्तक पृ. 998, 998
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरा मरण अपनी इच्छापर है, परन्तु फिर भी मैं यह शरीर नहीं छोड़ता; क्योंकि वेदोंने वर्णन किया है कि शरीरके बिना भजन नहीं होता। पहले मोहने मेरी बड़ी दुर्दशा की। श्रीरामजीके विमुख होकर मैं कभी सुखसे नहीं सोया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 998 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तजउँ न तन निज इच्छा मरना। तन बिनु बेद भजन नहिं बरना।।
English explanation
Though I can die at will, I do not give up this body; the Vedas do not describe devotional worship without a body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तजउँ | मैं छोड़ता हूँ | I give up |
| न | नहीं | not |
| तन | शरीर | the body |
| निज | अपनी | my own |
| इच्छा | इच्छा से | at will |
| मरना | मरना | dying |
| तन | शरीर के | a body |
| बिनु | बिना | without |
| बेद | वेदों ने | the Vedas |
| भजन | भजन | devotional worship |
| नहिं | नहीं | not |
| बरना | वर्णन किया | have described |
2 प्रथम मोहँ मोहि बहुत बिगोवा। राम बिमुख सुख कबहुँ न सोवा।।
English explanation
Earlier, delusion brought me much misery; turned away from Rama, I never slept in peace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथम | पहले | earlier |
| मोहँ | मोह ने | delusion |
| मोहि | मुझे | me |
| बहुत | बहुत | greatly |
| बिगोवा | दुर्दशा में डाला | brought to misery |
| राम | राम से | from Rama |
| बिमुख | विमुख | turned away |
| सुख | सुख से | in peace |
| कबहुँ | कभी | ever |
| न | नहीं | not |
| सोवा | सोया | slept |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.96
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 998
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 998, 998
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।