उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाना जनम कर्म पुनि नाना। किए जोग जप तप मख दाना।।
मूल पाठ
नाना जनम कर्म पुनि नाना। किए जोग जप तप मख दाना।।
कवन जोनि जनमेउँ जहँ नाहीं। मैं खगेस भ्रमि भ्रमि जग माहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.96 · पुस्तक पृ. 998, 998
भावार्थ
मूल पाठ के बादअनेकों जन्मोंमें मैंने अनेकों प्रकारके योग, जप, तप, यज्ञ और दान आदि कर्म किये। हे गरुडज़ी! जगत्में ऐसी कौन योनि है, जिसमें मैंने [बार-बार] घूम-फिरकर जन्म न लिया हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 998 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नाना जनम कर्म पुनि नाना। किए जोग जप तप मख दाना।।
English explanation
I passed through many births and performed many kinds of actions—yoga, recitation, austerities, sacrifices, and charity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाना | अनेक | many |
| जनम | जन्म | births |
| कर्म | कर्म | actions |
| पुनि | फिर | then also |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| किए | किए | performed |
| जोग | योग-साधना | yogic practice |
| जप | मंत्र-जप | sacred recitation |
| तप | तपस्या | austerities |
| मख | यज्ञ | ritual sacrifices |
| दाना | दान | charity |
2 कवन जोनि जनमेउँ जहँ नाहीं। मैं खगेस भ्रमि भ्रमि जग माहीं।।
English explanation
O king of birds, wandering again and again through the world, in what form of life have I not been born?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कवन | किस | what |
| जोनि | जन्म-योनि में | form of life |
| जनमेउँ | मैं जन्मा | I was born |
| जहँ | जिसमें | in which |
| नाहीं | नहीं | not |
| मैं | मैं | I |
| खगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| भ्रमि | भटकते | wandering |
| भ्रमि | बार-बार भटकते | wandering repeatedly |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.96
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 998
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 998, 998
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।