उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखेउँ करि सब करम गोसाई। सुखी न भयउँ अबहिं की नाई।।
मूल पाठ
देखेउँ करि सब करम गोसाई। सुखी न भयउँ अबहिं की नाई।।
सुधि मोहि नाथ जन्म बहु केरी। सिव प्रसाद मति मोहँ न घेरी।।
स्रोत अभिलेख 7.96 · पुस्तक पृ. 998, 998
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे गुसाईं! मैंने सब कर्म करके देख लिये, पर अब (इस जन्म) की तरह मैं कभी सुखी नहीं हुआ। हे नाथ! मुझे बहुत-से जन्मोंकी याद है। [क्योंकि] श्रीशिवजीकी कृपासे मेरी बुद्धिको मोहने नहीं घेरा॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 998 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 देखेउँ करि सब करम गोसाई। सुखी न भयउँ अबहिं की नाई।।
English explanation
My lord, I tried performing every kind of action, yet I was never as happy as I am now.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखेउँ | मैंने आज़माकर देख लिया | I tried and experienced |
| करि | करके | by performing |
| सब | सभी | all |
| करम | कर्म | actions |
| गोसाई | हे स्वामी | my lord |
| सुखी | सुखी | happy |
| न | नहीं | not |
| भयउँ | मैं हुआ | I became |
| अबहिं | अभी | now |
| की | के | of |
| नाई | समान | like |
2 सुधि मोहि नाथ जन्म बहु केरी। सिव प्रसाद मति मोहँ न घेरी।।
English explanation
My lord, I remember many births; through Shiva’s grace, delusion has not enveloped my understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुधि | स्मृति | remembrance |
| मोहि | मुझे | to me |
| नाथ | हे नाथ | my lord |
| जन्म | जन्मों | births |
| बहु | अनेक | many |
| केरी | की | of |
| सिव | भगवान शिव की | of Lord Shiva |
| प्रसाद | कृपा से | through grace |
| मति | बुद्धि को | my understanding |
| मोहँ | मोह ने | delusion |
| न | नहीं | not |
| घेरी | घेरा | enveloped |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.96
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 998
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 998, 998
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