उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो ग्यानिन्ह कर चित अपहरई। बरिआई बिमोह मन करई।।
मूल पाठ
जो ग्यानिन्ह कर चित अपहरई। बरिआई बिमोह मन करई।।
जेहिं बहु बार नचावा मोही। सोइ ब्यापी बिहंगपति तोही।।
स्रोत अभिलेख 7.59 · पुस्तक पृ. 963, 964
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो ज्ञानियोंके चित्तको भी भलीभाँति हरण कर लेती है और उनके मनमें जबर्दस्ती बड़ा भारी मोह उत्पन्न कर देती है, तथा जिसने मुझको भी बहुत बार नचाया है, हे पक्षिराज! वही माया आपको भी व्याप गयी है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 964 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जो ग्यानिन्ह कर चित अपहरई। बरिआई बिमोह मन करई।।
English explanation
That maya carries away even the minds of the wise and forcibly plunges the mind into delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो माया | which maya |
| ग्यानिन्ह | ज्ञानियों | of the wise |
| कर | का | possessive: of |
| चित | चित्त | mind; consciousness |
| अपहरई | हर लेती है | carries away |
| बरिआई | बलपूर्वक | forcibly |
| बिमोह | मोहग्रस्त | deluded |
| मन | मन को | the mind |
| करई | कर देती है | makes |
2 जेहिं बहु बार नचावा मोही। सोइ ब्यापी बिहंगपति तोही।।
English explanation
The same maya that has made me dance many times has now overtaken you, O king of birds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिस माया ने | by which maya |
| बहु | अनेक | many |
| बार | बार | times |
| नचावा | नचाया; अपने वश में चलाया | made dance; controlled |
| मोही | मुझे | me |
| सोइ | वही | that very same |
| ब्यापी | छा गई | has overtaken |
| बिहंगपति | हे पक्षियों के स्वामी, गरुड़ | O lord of birds, Garuda |
| तोही | तुम पर | over you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 964
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 963, 964
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