उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ब्याकुल गयउ देवरिषि पाहीं। कहेसि जो संसय निज मन माहीं।।
मूल पाठ
ब्याकुल गयउ देवरिषि पाहीं। कहेसि जो संसय निज मन माहीं।।
सुनि नारदहि लागि अति दाया। सुनु खग प्रबल राम कै माया।।
स्रोत अभिलेख 7.59 · पुस्तक पृ. 963, 964
भावार्थ
मूल पाठ के बादव्याकुल होकर वे देवॢष नारदजीके पास गये और मनमें जो सन्देह था, वह उनसे कहा। उसे सुनकर नारदको अत्यन्त दया आयी। [उन्होंने कहा—] हे गरुड़! सुनिये, श्रीरामजीकी माया बड़ी ही बलवती है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 964 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 ब्याकुल गयउ देवरिषि पाहीं। कहेसि जो संसय निज मन माहीं।।
English explanation
Agitated, he went to the divine sage Narada and told him the doubt in his own mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्याकुल | व्याकुल होकर | in distress |
| गयउ | गया | went |
| देवरिषि | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| पाहीं | के पास | to; near |
| कहेसि | उसने कहा | he told |
| जो | जो | which; whatever |
| संसय | संदेह | doubt |
| निज | अपने | his own |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | in |
2 सुनि नारदहि लागि अति दाया। सुनु खग प्रबल राम कै माया।।
English explanation
Hearing this, Narada felt great compassion. He said, “Listen, O bird: Rama’s maya is immensely powerful.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| नारदहि | नारद को | to Narada |
| लागि | अनुभव हुई; आई | arose; was felt |
| अति | बहुत | great; very |
| दाया | दया | compassion |
| सुनु | सुनो | listen |
| खग | हे पक्षी, गरुड़ | O bird, Garuda |
| प्रबल | बहुत शक्तिशाली | powerful |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| कै | की | of; belonging to |
| माया | माया; मोह में डालने वाली शक्ति | maya; the power that causes delusion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 964
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 963, 964
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