उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाना भाँति मनहि समुझावा। प्रगट न ग्यान हृदयँ भ्रम छावा।।
मूल पाठ
नाना भाँति मनहि समुझावा। प्रगट न ग्यान हृदयँ भ्रम छावा।।
खेद खिन्न मन तर्क बढ़ाई। भयउ मोहबस तुम्हरिहिं नाई।।
स्रोत अभिलेख 7.59 · पुस्तक पृ. 963, 964
भावार्थ
मूल पाठ के बादगरुडज़ीने अनेकों प्रकारसे अपने मनको समझाया। पर उन्हें ज्ञान नहीं हुआ, हृदयमें भ्रम और भी अधिक छा गया। [सन्देहजनित] दु:खसे दुखी होकर, मनमें कुतर्क बढ़ाकर वे तुम्हारी ही भाँति मोहवश हो गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 963 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नाना भाँति मनहि समुझावा। प्रगट न ग्यान हृदयँ भ्रम छावा।।
English explanation
AI draft: He tried to reason with his mind in many ways, but understanding did not dawn, and confusion clouded his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाना | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| मनहि | मन को | the mind |
| समुझावा | समझाया | tried to persuade |
| प्रगट | प्रकट हुआ | became manifest |
| न | नहीं | not |
| ग्यान | ज्ञान; सही समझ | knowledge; clear understanding |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| भ्रम | भ्रम | confusion |
| छावा | छा गया | spread over |
2 खेद खिन्न मन तर्क बढ़ाई। भयउ मोहबस तुम्हरिहिं नाई।।
English explanation
Distressed by anguish and multiplying arguments in his mind, he became subject to delusion, just like you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खेद | खेद से | from anguish |
| खिन्न | दुःखी; व्यथित | distressed |
| मन | मन में | in the mind |
| तर्क | तर्क-वितर्क | arguments and speculation |
| बढ़ाई | बढ़ाकर | multiplying |
| भयउ | हो गया | became |
| मोहबस | मोह के वश में | under the sway of delusion |
| तुम्हरिहिं | तुम्हारी ही | just your |
| नाई | तरह | like; in the manner of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 963
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 963, 964
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।