उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो अति आतप ब्याकुल होई। तरु छाया सुख जानइ सोई।।
मूल पाठ
जो अति आतप ब्याकुल होई। तरु छाया सुख जानइ सोई।।
जौं नहिं होत मोह अति मोही। मिलतेउँ तात कवन बिधि तोही।।
स्रोत अभिलेख 7.69 · पुस्तक पृ. 972, 973
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो धूपसे अत्यन्त व्याकुल होता है, वही वृक्षकी छायाका सुख जानता है। हे तात! यदि मुझे अत्यन्त मोह न होता तो मैं आपसे किस प्रकार मिलता?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 972 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जो अति आतप ब्याकुल होई। तरु छाया सुख जानइ सोई।।
English explanation
Only one greatly distressed by the sun’s heat knows the comfort of a tree’s shade.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो व्यक्ति | one who |
| अति | बहुत | greatly |
| आतप | धूप की तपन से | by the sun’s heat |
| ब्याकुल | व्याकुल | distressed |
| होई | होता है | becomes |
| तरु | वृक्ष की | a tree’s |
| छाया | छाया का | shade’s |
| सुख | सुख | comfort |
| जानइ | जानता है | knows |
| सोई | वही व्यक्ति | that very person |
2 जौं नहिं होत मोह अति मोही। मिलतेउँ तात कवन बिधि तोही।।
English explanation
Had I not fallen into great delusion, dear one, how would I have met you?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| नहिं | नहीं | not |
| होत | हुआ होता | had arisen |
| मोह | मोह | delusion |
| अति | अत्यधिक | great |
| मोही | मुझे | in me |
| मिलतेउँ | मैं मिलता | would I have met |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| कवन | किस | what |
| बिधि | प्रकार से | in what manner |
| तोही | तुमसे | you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.69
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 972
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 972, 973
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