उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे बरनाधम तेलि कुम्हारा। स्वपच किरात कोल कलवारा।।
मूल पाठ
जे बरनाधम तेलि कुम्हारा। स्वपच किरात कोल कलवारा।।
नारि मुई गृह संपति नासी। मूड़ मुड़ाइ होहिं सन्यासी।।
स्रोत अभिलेख 7.1 · पुस्तक पृ. 1002, 1002
भावार्थ
मूल पाठ के बादतेली, कुम्हार, चाण्डाल, भील, कोल और कलवार आदि जो वर्णमें नीचे हैं, स्त्रीके मरनेपर अथवा घरकी सम्पत्ति नष्ट हो जानेपर सिर मुँड़ाकर संन्यासी हो जाते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1002 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जे बरनाधम तेलि कुम्हारा। स्वपच किरात कोल कलवारा।।
English explanation
Those ranked low within the text’s caste hierarchy—oil-pressers, potters, those called dog-cookers, Kiratas, Kols, and liquor-makers—are the subjects continued in the next line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| बरनाधम | वर्ण-क्रम में अधम कहे गए | ranked lowest in the caste hierarchy |
| तेलि | तेल निकालने वाले समुदाय के लोग | members of the oil-presser community |
| कुम्हारा | कुम्हार; मिट्टी के बर्तन बनाने वाले | potters |
| स्वपच | शाब्दिकतः कुत्ता पकाने वाले; बहिष्कृत समुदाय का पद | literally dog-cookers; a term for an outcast community |
| किरात | किरात वनवासी या शिकारी समुदाय | Kirata forest-dwelling or hunting communities |
| कोल | कोल आदिवासी समुदाय | the Kol tribal community |
| कलवारा | मदिरा बनाने या बेचने वाला कलवार समुदाय | the Kalwar liquor-making or selling community |
2 नारि मुई गृह संपति नासी। मूड़ मुड़ाइ होहिं सन्यासी।।
English explanation
When their wife dies or their household wealth is lost, they shave their heads and become renunciants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारि | पत्नी | wife |
| मुई | मर गई | died |
| गृह | घर की | household |
| संपति | संपत्ति | wealth |
| नासी | नष्ट हो गई | was lost |
| मूड़ | सिर | head |
| मुड़ाइ | मुँड़वाकर | having shaved |
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| सन्यासी | संन्यासी; गृहस्थ जीवन त्यागने वाले | renunciants who leave household life |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1002
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1002, 1002
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।