उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आपु गए अरु तिन्हहू घालहिं। जे कहुँ सत मारग प्रतिपालहिं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे स्वयं तो नष्ट हुए ही रहते हैं; जो कहीं सन्मार्गका प्रतिपालन करते हैं, उनको भी वे नष्ट कर देते हैं। जो तर्क करके वेदकी निन्दा करते हैं, वे लोग कल्प-कल्पभर एक-एक नरकमें पड़े रहते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1002 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आपु गए अरु तिन्हहू घालहिं। जे कहुँ सत मारग प्रतिपालहिं।।
कल्प कल्प भरि एक एक नरका। परहिं जे दूषहिं श्रुति करि तरका।।
स्रोत अभिलेख 7.1 · पुस्तक पृ. 1002, 1002
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 आपु गए अरु तिन्हहू घालहिं। जे कहुँ सत मारग प्रतिपालहिं।।
English explanation
They themselves have fallen and bring down even those who follow the righteous path wherever they may be.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आपु | स्वयं | themselves |
| गए | पतित हो गए | have fallen |
| अरु | और | and |
| तिन्हहू | उनको भी | even those people |
| घालहिं | पतन में डालते हैं | bring to ruin |
| जे | जो | who |
| कहुँ | कहीं | anywhere |
| सत | सच्चा और सदाचारी | true and righteous |
| मारग | मार्ग | path |
| प्रतिपालहिं | पालन करते हैं | follow faithfully |
2 कल्प कल्प भरि एक एक नरका। परहिं जे दूषहिं श्रुति करि तरका।।
English explanation
Those who use argument to find fault with the Vedas remain in each hell for an entire cosmic age.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कल्प | कल्प; अत्यंत दीर्घ ब्रह्मांडीय काल | a cosmic age |
| कल्प | कल्प; पुनरुक्ति से प्रत्येक कल्प | a cosmic age; repeated distributively |
| भरि | भर; पूरी अवधि तक | throughout the full duration |
| एक | एक | one |
| एक | एक; मिलकर प्रत्येक | one; together, each |
| नरका | नरक में | in hell |
| परहिं | पड़े रहते हैं | remain fallen |
| जे | जो | those who |
| दूषहिं | दोष लगाते हैं; निंदा करते हैं | find fault with; denigrate |
| श्रुति | वेदों को | the Vedas |
| करि | करके | by making |
| तरका | तर्क | arguments |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1002
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1002, 1002
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।