उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पर त्रिय लंपट कपट सयाने। मोह द्रोह ममता लपटाने।।
मूल पाठ
पर त्रिय लंपट कपट सयाने। मोह द्रोह ममता लपटाने।।
तेइ अभेदबादी ग्यानी नर। देखा में चरित्र कलिजुग कर।।
स्रोत अभिलेख 7.1 · पुस्तक पृ. 1002, 1002
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो परायी स्त्रीमें आसक्त, कपट करनेमें चतुर और मोह, द्रोह और ममतामें लिपटे हुए हैं, वे ही मनुष्य अभेदवादी (ब्रह्म और जीवको एक बतानेवाले) ज्ञानी हैं। मैंने उस कलियुगका यह चरित्र देखा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1002 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पर त्रिय लंपट कपट सयाने। मोह द्रोह ममता लपटाने।।
English explanation
AI draft: They lust after others’ wives, are adept at deceit, and are entangled in delusion, malice, and possessive attachment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पर | दूसरों की | others’ |
| त्रिय | स्त्रियाँ; यहाँ दूसरों की पत्नियाँ | women; here, others’ wives |
| लंपट | कामासक्त | lustful |
| कपट | छल-कपट में | in deceit |
| सयाने | चतुर | adept |
| मोह | मोह | delusion |
| द्रोह | द्वेष और अहित की भावना | malice and hostility |
| ममता | मेरापन और आसक्ति | possessiveness and attachment |
| लपटाने | लिपटे हुए | entangled |
2 तेइ अभेदबादी ग्यानी नर। देखा में चरित्र कलिजुग कर।।
English explanation
Those very men pass as wise proponents of non-difference; I have seen this conduct of the Kali age.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेइ | वे ही | those very people |
| अभेदबादी | अभेद का मत प्रतिपादित करने वाले | proponents of non-difference |
| ग्यानी | ज्ञानी कहलाने वाले | regarded as wise |
| नर | पुरुष | men |
| देखा | देखा है | have seen |
| में | मैंने | I |
| चरित्र | आचरण; दशा | conduct; state of affairs |
| कलिजुग | कलियुग | the Kali age |
| कर | का | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1002
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1002, 1002
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।